MS06 संतवाणी सटीक ।। 33 सन्तो के ईश्वर-भक्ति, साधना, बंधन-मोक्ष इत्यादि से सम्बंधित वचनों का सटीक संग्रह ।

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संतों की वाणी संतों की अनुभूतियों और अनुभवों का अगम और अपार सिन्धु है । संतों का अनुभव योग-समाधि का अनुभव है, जो योग-अभ्यास की अन्तिम प्रत्यक्षता है,

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गुरु महाराज ने दृढ़ता के साथ यह ज्ञान बतलाया कि सब संतों का एक ही मत है । मैंने सोचा कि यदि बहुत - से संतों की वाणियों का संग्रह किया जाए , तो उस संग्रह के पाठ से गुरु महाराज की उपर्युक्त बात की यथार्थता लोगों को उत्तमता से विदित हो जाएगी । इसी हेतु मैंने यत्र - तत्र से उनका संग्रह किया ।

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संतों की वाणी संतों की अनुभूतियों और अनुभवों का अगम और अपार सिन्धु है । संतों का अनुभव योग - समाधि का अनुभव है , जो योग - अभ्यास की अन्तिम प्रत्यक्षता है , न कि केवल सोच - विचार का साहित्यिक अनुभव । ऐसे समुद्र में उसके ऊपरी तल में भी गोता लगाना अति दुर्लभ है , फिर उसके अन्तर की तह के अंत तक पहुँचकर उसका पूर्ण ज्ञाता बनना विकट से भी विकट , दुर्लभ से भी दुर्लभ और अद्वितीय महान कार्य है । मैं तो अपने को उसके ऊपरी तल में भी गोता लगाने के योग्य नहीं बना सकता हूँ , केवल उस तल को शायद कभी - कभी छू भर पाता हूँ ।
संतों ने ज्ञान और योग - युक्त ईश्वर - भक्ति को अपनाया । ईश्वर के प्रति अपना प्रगाढ़ प्रेम अपनी वाणियों में दर्शाया है । उनकी यह प्रेमधारा ज्ञान से सुसंस्कृत तथा सुरत - शब्द के सरलतम योग - अभ्यास से बलवती होकर , प्रखर और प्रबल रूप से बढ़ती हुई अनुभूतियों और अनुभव से एकीभूत हो गई थी , जहाँ उन्हें ईश्वर का साक्षात्कार हुआ और परम मोक्ष प्राप्त हुआ था । उनकी वाणी उन्हीं गम्भीरतम अनुभूतियों और सर्वोच्च अनुभव को अभिव्यक्त करने की क्षमता से सम्पन्न और अधिकाधिक समर्थ है । ' संतवाणी सटीक ' में पाठकगण उसी विषय को पाठ कर जानेंगे ।



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